समाज के विभिन्न तबकों की सेवा में समर्पित बहुमुखी प्रतिभा के धनी मनमोहन भारद्वाज

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राजधानी दिल्ली में शहीदों के गांव के नाम से मशहूर एक क़स्बा अलीपुर गांव। इसी गांव में 7 अगस्त 1956 को पंडित कन्हैया लाल शर्मा के घर में जन्में मनमोहन भारद्वाज बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद 1976 में दिल्ली नगर निगम में नौकरी लग गई। अपनी लगन और मेहनत के बल पर मनमोहन भारद्वाज ने 1986 में प्रमोशन हासिल किया और सहायक सफाई निरीक्षक बने। तत्कालीन निगमायुक्त से 1996 में सर्वश्रेष्ठ सहायक सफाई निरीक्षक का प्रशस्ती सम्मान भी मिला। इनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ इनके सौम्य व्यवहार के कारण 1997 में सनातन धर्म सभा ने अपने महासम्मेलन में इन्हें सम्मानित कर इनका आभार जताया।

जनसेवा और लोककल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए मनमोहन भारद्वाज को लायंस क्लब नरेला सिटी ने भी सम्मानित किया। 2004 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी श्री भारद्वाज को भागीदारी योजना के तहत सम्मानित किया।

ग्रामीण परिवेश से मनमोहन भारद्वाज का हमेशा से ही विशेष लगाव रहा। बात चाहे अलीपुर गांव में सुपर बाजार की शाखा खुलवाने की हो, शहीद स्मारक बनवाने की हो या स्टेडियम निर्माण की हो… मनमोहन भारद्वाज ने एक सच्चे समाजसेवी के तौर पर हर संभव प्रयास किया। आज ये सभी सुविधाएं अलीपुर के निवासियों को मुहैया हो पायी इसमें श्री भारद्वाज को योगदान अविस्मरणीय है। निगम में डयूटी के दौरान विभिन्न संस्थाओं से इनका जुड़ाव बना रहा और समाचार पत्रों के माध्यम से भी इन्होंने ज्वलंत समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने हमेशा मजबूती से रखा।

मनमोहन भारद्वाज के कार्यों को देखते हुए 2016 में इन्हें निगम द्वारा मुख्य सफाई निरीक्षक के तौर पर प्रमोशन दी गई। अगस्त 2016 में ही इन्होंने अपने सेवा के 40 साल पूरे करने के बाद रिटायरमेन्ट लिया। पर शायद मनमोहन भारद्वाज का समाजसेवी के रूप में सफर अभी बाकी था। रिटायर्ड होने के बाद मनमोहन भारद्वाज को उसी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ना पड़ा जिसमें उन्होंने 40 सालों तक ईमानदारी से नौकरी की। सेवा से रिटायर्ड होने के बाद आज भी मनमोहन भारद्वाज रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलने वाले जीपीएफ, कमन्यूटेशन, इनश्योरेन्स, मेडिकल रिम्बर्समेन्ट के बिलों के भुगतान आदि समस्याओं के निराकरण की दिशा में संघर्षरत हैं। वर्तमान में सेवानिवृत वरिष्ठ नागरिक वैलफेयर एसोसिशन के माध्यम से मनमोहन भारद्वाज ग्रामीण नरेला क्षेत्र के तकरीबन 1500 रिटायर्ड कर्मचारियों की अगुवाई कर रहे हैं। कैशलेस मेडिकल कार्ड, रिम्बर्समेन्ट बिलों के भुगतान, पेन्शन सिस्टम में सुधार आदि मुद्दों पर मुखरता से काम कर रहे हैं।

गरीब-गुरबों और रिटायर्ड कर्मचारियों की आवाज बनकर बिना किसी लालच समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे समाजसेवी मनमोहन भारद्वाज समाज के हर तबके बीच खासे लोकप्रिय हैं। समाज के दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए ये हमेशा से समर्पित रहे हैं। कार्ल मास्र्क को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले मनमोहन भारद्वाज ने अपनी सर्विस के दौरान जहां स्टाफ और कामगारों के हितों के लिए संघर्ष किया वहीं, अपने निवास क्षेत्र में भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर जनसुविधाओं के विकास के लिए भी काफी काम किया। मसलन, पार्कों का सौन्दर्यीकरण, सीवरेज समस्या, सड़कों व नालियों का निर्माण, मंदिरों की देखभाल आदि मुद्दों के साथ-साथ बिजली, पानी और परिवहन में सुधार के लिए भी श्री भारद्वाज ने उल्लेखनीय प्रयास किये। समाज के विभिन्न तबकों की सेवा में समर्पित श्री भारद्वाज को ग्लैम डस्ट एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित करते हुए हम गर्वान्वित अनुभव करते हैं।


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